॥ राधे राधे ॥

मेरे जर जर है पांव संभालो हरि
अपने चरणों की छाँव बिठा लो हरि,
मेरे जर जर है पांव
माया ममता की गलियों में भटका हुआ,
मैं हु तृष्णा के पिंजरे में अटका हुआ,
डाला विषयों ने घाव निकालो हरि,
मेरे जर जर है पांव...
गहरी नदियां की लहरें दीवानी हुई,
टूटे चप्पू पतवार पुरानी हुई,
अब ये डूबेगी की नाव बचा लो प्रभु ,
अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,
मेरे जर जर है पांव
कोई पथ न किसे ने सुझाया मुझे,
फिर भी देखो कहा की दिखलाया मुझे,
तुमसे मिलने का चाव मिला लो प्रभु,
अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,
मेरे जर जर है पांव
मन को मुरली की धुन का सहारा मिले,
तन को यमुना का शीतल किनारा मिले,
हमको वृन्दावन धाम वसा लो प्रभु,
अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,
मेरे जर जर है पांव
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