॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Mere Jar Jar H Panv Sambhalo Hari Apne Charno Ki Chhanv M
Krishna - Longing Bhav
Artist: Shrijirasik
मेरे जर जर है पांव संभालो हरि
अपने चरणों की छाँव बिठा लो हरि,
मेरे जर जर है पांव
माया ममता की गलियों में भटका हुआ,
मैं हु तृष्णा के पिंजरे में अटका हुआ,
डाला विषयों ने घाव निकालो हरि,
मेरे जर जर है पांव...
गहरी नदियां की लहरें दीवानी हुई,
टूटे चप्पू पतवार पुरानी हुई,
अब ये डूबेगी की नाव बचा लो प्रभु ,
अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,
मेरे जर जर है पांव
कोई पथ न किसे ने सुझाया मुझे,
फिर भी देखो कहा की दिखलाया मुझे,
तुमसे मिलने का चाव मिला लो प्रभु,
अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,
मेरे जर जर है पांव
मन को मुरली की धुन का सहारा मिले,
तन को यमुना का शीतल किनारा मिले,
हमको वृन्दावन धाम वसा लो प्रभु,
अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,
मेरे जर जर है पांव
✨
Related Bhajans
Discover more devotional songs