॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Dil Ki Har Dhakan Se Tera Naam Nikalta Hai
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
जन्मों पे जनम लेकर मैं हार गया मोहन
दर्शन बिन व्यर्थ हुआ हर बार मेरा जीवन
अब धैर्य नहीं मुझमे इतना तू परखता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
क्या खेल सजाया है मोहरो की तरह हमको
क्या खूब नचाया है कठपुतली सा हमको
ये खेल तेरे न्यारे बस तू ही समझता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
ये दिल पुकारता है एक बार चले आओ
दर्शन देकर प्यारे मेरी बिगड़ी बना जाओ
प्रियतम मेरे दिल में अरमान मचलता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
कर भी दो दया मोहन हम भी तो तुम्हारे हैं
एक बार तो अपना लो जन्मों से तुम्हारे हैं
तेरे नित्य मिलन को अब जीवन तरसता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
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