॥ राधे राधे ॥

चली शंकर की बरतिया हिमाचल नगरी
बूढ़े बैल पे शिव जी बैठे गले मुंड की माला ,
सारे अंग भभूति लगाये गले नाग है काला ,
काली ओढ़े हैं कमरिया हिमाचल नगरी
चली शंकर की बरतिया हिमाचल नगरी ||
पुरवासी सब देखन लागे कैसे हैं बाराती ,
भूत प्रेत और देव श्रषि मुनि संग में हैं बाराती ,
कैसी दूल्हा की सुरतिया हिमाचल नगरी
चली शंकर की बरतिया हिमाचल नगरी ||
मैनावती आरती लेकर परछन करने आईं ,
शिवशंकर का रूप देखकर मन ही मन घबड़ाईं ,
गिर गई हाथों से आरतिया हिमाचल नगरी
चली शंकर की बरतिया हिमाचल नगरी ||
शिव के जैसा और न कोई नारद ने समझाया ,
तब गौरा और शंकर का खुश होके ब्याह रचाया ,
पड़ गईं पड़ गईं रे भांवरिया हिमाचल नगरी
चली शंकर की बरतिया हिमाचल नगरी
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