॥ नाहं स्मरामि कृष्णं तु राधास्मरणवर्जितम् ॥
Maa Sharda - स्तुति
देवी-देवताओं की स्तुति
स्तुति (3)
Saraswati Prathna
stutiShrijirasik
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी
अम्ब विमल मति दे
अम्ब विमल मति दे
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी
अम्ब विमल मति दे
अम्ब विमल मति दे
जग सिरमौर बनाएँ भारत
वह बल विक्रम दे
वह बल विक्रम दे
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी
अम्ब विमल मति दे
अम्ब विमल मति दे
साहस शील हृदय में भर दे
जीवन त्याग-तपोमय कर दे
साहस शील हृदय में भर दे
जीवन त्याग-तपोमय कर दे
संयम सत्य स्नेह का वर दे
स्वाभिमान भर दे
संयम सत्य स्नेह का वर दे
स्वाभिमान भर दे।
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी
अम्ब विमल मति दे
अम्ब विमल मति दे
लव-कुश ध्रुव प्रहलाद बनें हम
मानवता का त्रास हरें हम
लव-कुश ध्रुव प्रहलाद बनें हम
मानवता का त्रास हरें हम
सीता सावित्री दुर्गा मां
फिर घर-घर भर दे
सीता सावित्री दुर्गा मां
फिर घर-घर भर दे।
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी
अम्ब विमल मति दे
अम्ब विमल मति दे
अम्ब विमल मति दे
Vande Mataram
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वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम् मलय़जशीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुरभाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
के बॉले मां तुमि अबले,
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीं मातरम्। वन्दे मातरम्।
तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि मां शक्ति,
हृदये तुमि मां भक्ति,
तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे। वन्दे मातरम् ।
त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,
नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम्।
श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्,
धरणीम् भरणीम् मातरम्। वन्दे मातरम्।
He Hans Vahini Gyan Dayini
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हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
जग सिरमौर बनाएँ भारत,
वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी…..
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
साहस शील हृदय में भर दे, जीवन त्याग-तपोमर कर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥१॥
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी….
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
लव-कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम
मानवता का त्रास हरें हम,
सीता, सावित्री, दुर्गा मां,
फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥२॥