॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Aarti Ahoi Mata Ki
अहोई माता की
जय अहोई माता जय अहोई माता।
तुमको निशिदिन सेवत हर विष्णु विधाता॥
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
ब्रह्माणी रूद्राणी कमला तू ही है जगमाता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय होई माता। माता रूप निरंजन सुख सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल आता।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
तू ही है पाताल वसंती, तू ही शुभदाता।
कर्मप्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
जिस घर थारो बासो वाही में गुण आता।
कर न सके सोई करले मन नहीं घबराता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पाता।
खान पान का वैभव तुम बिन नही जाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
शुभ गुण सुन्दर मुक्ता क्षीरनिधि जाता।
रत्न चतुर्दश तोकूं कोई नहीं पाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई भी गाता।
उर उमंग अतिं उपजे पाप उतर जाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
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