॥ नाहं स्मरामि कृष्णं तु राधास्मरणवर्जितम् ॥
Laxmi Ji - आरती
दैनिक आरती संग्रह
आरती (1)
Aarti Tulsi Mata Ki
aartiShrijirasik
जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।
घर घर तुलसी पूजा ,सब जग गुण गता।। जय तुलसी....
रूप जलंधर का घर ,विष्णु की माया ,
माया ने कर कौतुक ,वृंदा को भरमाया। जय तुलसी.....
पति पारायण वृंदा ,विष्णु को शाप दिया ,
उसी शाप के बल पर ,शिला विष्णु को किया। जय तुलसी.....
वृंदा तुलसी बनकर परमगति पायो ,
लक्ष्मी से भी बढकर ,हरी प्रिया कहलायो। जय तुलसी.....
तुलसी बनकर वृंदा ,मरकर भी जिंदा ,
देव असुर सब पूजित ,परम सति वृंदा। जय तुलसी.....
देव उठनी एकादशी ,कार्तिक में आवे ,
तुलसी विवाह का उत्सव ,हर मन को भावे। जय तुलसी.....
सजे मण्डप, सजे वेदी, हर कोई दान करे ,
शालिग्राम श्री विष्णु ,तुलसी का वरण करे। जय तुलसी.....
गंगा यमुना जैसी ,अति पावन तुलसी ,
बन संजीवन औषधि ,रोग शोक हरती। जय तुलसी.....
तुलसी दर्शन पूजा ,जो गुणगान करे ,
कहै ‘‘मधुप’’ माँ तुलसी ,उसे भव पार करे। जय तुलसी.....